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Old 09-27-2014, 09:46 AM
Sonia Sidhu's Avatar
Sonia Sidhu Sonia Sidhu is offline
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Default Mata Chandraghanta - Navratri Day 3

Maa Chandraghanta is the third Shakti of Maa Durga. Maa Chandraghanta is worshiped on the third day of Navrti Pooja. Those who worship Devi Chandraghanta get eternal strength and be blessed by Devi Maa to be happy through out one’s life.

Maa Chandraghanta is one Who establishes justice and wears crescent moon on Her head. Because of this bell shaped mark of moon which is present on the fore head of Maa Chandraghanta, Maa is known as Chandraghanta. The colour of her body is golden, she rides on lion who descrides “dharma”, possesses ten hands and three eyes, eight of Her hands display weapons while the remaining two are respectively in the mudras of gestures of boon giving and stopping harm. Devi Maa is posed as to be ready for war. “Chandra Ghanta” meaning supreme bliss and knowledge, showering peace and serenity, like cool breeze in a moonlit night. By her blessings all the hindrances coming in way of a person are removed. Her pleasant looks clears all sorrows and sadness of her devotees. Her roaring voice alerts and makes the Demons to tremble.

The third day of Navratri is very important in Navaratri. This day the mind of the sadhak enters Manipura Cakra. At this stage by the grace of Maa Chandraghanta he becomes capable of seeing unearthly and divine things. He smells the divine fragrance and many types of divine sound become audible to him. On this day and in this stage of discipline the sadhak is required to be most careful.

By the grace of Mother Chandraghanta all sins of the sadhak (striver) are burnt up and obstacles removed. Her worship is instantly fruitful. She is always in a gesture as if ready to proceed for the battlefield and thus she removes the difficulties of devotees very promptly. Her vehicle is lion and so her worshiper becomes valorous and fearless like a lion. The sound of her bell always protects her devotees from evil spirits. As soon as the sadhak invokes her, her bell immediately becomes active and starts ringing to protect the devotee under her shelter.

Even though she keeps her always busy in killing and suppressing the wicked, yet to her devotees and worshipers she looks most serene, gentle and peaceful. A very good quality that is developed in her devotees who worship her, is-the striver cultivates bravery and fearlessness accompanied by serenity and humility. His face, eyes and the entire body gets effulgent. His voice becomes divinely sweet. Wherever the devotee worshiper of mother Chandraghanta go, they disperse peace and blessings among the people. From the body of such a striver there always takes place an invisible radiation of divinely lighted atoms. This divine action is beyond the perceiving capacity of physical eyes but the striver himself and his associates go on experiencing this fact every now and then. By purifying his mind, words, deeds and body through prescribed manner we should worship the mother Chandraghanta and take shelter under her feet. Through worshiping her we can get rid of all worldly sorrows, and attain the supreme goal spontaneously. We should always try to advance on the path of spiritual discipline by contemplating on the sacred image of the mother. Contemplating on her, we can attain the mundane perfection and ultimate good in the other world.

:: Dhyan Mantra ::

Pindajapravararudha Chandakopastrakairyuta |
Prasadam Tanute Mahyam Chandraganteti Vishruta ||

Last edited by Sonia Sidhu : 09-27-2014 at 05:45 PM.
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Old 09-27-2014, 06:12 PM
Ila Sharma's Avatar
Ila Sharma Ila Sharma is offline
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Posts: 388

इन दिनों नवरात्र व्रत चल रहे हैं और इन पावन दिनों में मां भगवती की पूजा अर्चना का बेहद विशेष फल मिलता है. जो भक्त इन दिनों मां की सच्चे मन से पूजा करता है मां उसके कष्ट अवश्य दूर करती हैं. आज नवरात्र का तीसरा दिन है. नवरात्र के तासरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा करने का विधान है.

Jai Ambe Gauriमां का तीसरा रूप: देवा चंद्रघंटा
नवरात्रे के दुर्गा-उपासना में तीसरे दिन की पूजा का अत्याधिक महत्व है। माता चन्द्रधण्टा की उपासना हमारे इस लोक और परलोक दोनों के लिए परमकल्याणकारी और सद् गति को देने वाली है।

मां भगवती का रूप

भगवती दुर्गा अपने तीसरे स्वरूप में चन्द्रघण्टा नाम से जानी जाती हैं। नवरात्र के तीसरे दिन इन्हीं के विग्रह का पूजन किया जाता है। इनका रूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। इनके मस्तक में घंटे के आकार का अर्धचन्द्र है। इसी कारण से इन्हें चन्द्रघंटा देवी कहा जाता है। इनके शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमकीला हैं। इनके दस हाथ हैं। इनके दसों हाथों में खड्ग, बाण अस्त्र दृ शस्त्र आदि विभूषित हैं। इनका वाहन सिंह है। इनकी मुद्रा युद्ध के लिए उद्यत रहने की होती है। इनके घंटे सी भयानक चण्ड ध्वनि से अत्याचारी दानव-दैत्य-राक्षस सदैव प्रकम्पित रहते हैं।

मां चन्द्रघंटा का स्त्रोत मंत्र:

ध्यान वन्दे वाच्छित लाभाय चन्द्रर्घकृत शेखराम।
सिंहारूढा दशभुजां चन्द्रघण्टा यशंस्वनीम्घ
कंचनाभां मणिपुर स्थितां तृतीयं दुर्गा त्रिनेत्राम।

खड्ग, गदा, त्रिशूल, चापशंर पद्म कमण्डलु माला वराभीतकराम्घ
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्यां नानालंकार भूषिताम।
मंजीर हार, केयूर, किंकिणि, रत्‍‌नकुण्डल मण्डिताम्घ
प्रफुल्ल वंदना बिबाधारा कांत कपोलां तुग कुचाम।

कमनीयां लावाण्यां क्षीणकटिं नितम्बनीम्घ
स्तोत्र आपद्धद्धयी त्वंहि आधा शक्तिरू शुभा पराम।
अणिमादि सिद्धिदात्री चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यीहम्घ्
चन्द्रमुखी इष्ट दात्री इष्ट मंत्र स्वरूपणीम।

धनदात्री आनंददात्री चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यहम्घ
नानारूपधारिणी इच्छामयी ऐश्वर्यदायनीम।
सौभाग्यारोग्य दायिनी चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यहम्घ्
कवच रहस्यं श्रणु वक्ष्यामि शैवेशी कमलानने।

श्री चन्द्रघण्टास्य कवचं सर्वसिद्धि दायकम्घ
बिना न्यासं बिना विनियोगं बिना शापोद्धरं बिना होमं।
स्नान शौचादिकं नास्ति श्रद्धामात्रेण सिद्धिकमघ
कुशिष्याम कुटिलाय वंचकाय निन्दकाय च।
न दातव्यं न दातव्यं न दातव्यं कदाचितम्घ शक्ति के रूप में विराजमान मां चंद्रघंटा मस्तक पर घंटे के आकार के चंद्रमा को धारण किए हुए हैं। देवी का यह तीसरा स्वरूप भक्तों का कल्याण करता है। इन्हें ज्ञान की देवी भी माना गया है। बाघ पर सवार मां चंद्रघंटा के चारों तरफ अद्भूत तेज है। इनके शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमकीला है। यह तीन नेत्रों और दस हाथों वाली हैं। इनके दस हाथों में कमल, धनुष-बाण, कमंडल, त्रिशूल और गदा जैसे अस्त्र-शस्त्र हैं। कंठ में सफेद पुष्पों की माला और शीर्ष पर रत्‍‌नजडि़त मुकुट विराजमान हैं। यह साधकों को चिरायु, आरोग्य, सुखी और संपन्न होने का वरदान देती हैं। कहा जाता है कि यह हर समय दुष्टों के संहार के लिए तैयार रहती हैं और युद्ध से पहले उनके घंटे की आवाज ही राक्षसों को भयभीत करने के लिए काफी होती है।

नवरात्रि में तीसरे दिन इसी देवी की पूजा का महत्व है। इसीलिए कहा जाता है कि हमें निरंतर उनके पवित्र विग्रह को ध्यान में रखकर साधना करना चाहिए। उनका ध्यान हमारे इहलोक और परलोक दोनों के लिए कल्याणकारी और सद्गति देने वाला है।

उपासना मंत्र

मां चन्द्रघंटा की उपासना करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला उपासना मंत्र :
पिण्डज प्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते महयं चन्दघण्टेति विश्रुता।।
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