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Subha Ki Kiran Jab Angan Chuu Jaye

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  • Subha Ki Kiran Jab Angan Chuu Jaye

    सुबह की किरण जब आँगन छू जाए,
    मन में नई उम्मीद जग जाए।
    थकी हुई साँसों को आराम मिले,
    हर सपना फिर से नाम पाए।

    चलते हैं हम वक्त की राहों पर,
    कभी हँसी, कभी आँसू साथ लिए।
    हर गिरना सिखाता है उठना,
    हर अँधेरा देता है नया सवेरा।

    दिल में अगर सच्चा विश्वास हो,
    तो मुश्किलें भी झुक जाती हैं।
    छोटे-छोटे पलों की खुशियों से,
    ज़िंदगी फिर मुस्कुराती है।

  • #2
    Subha ki kiran jab angan chhoo jaaye, mann mein nayi ummeedein jagti hain, har pal ek fresh shuruaat ka ehsaas de jaati hai.

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    • #3
      सुंदर कविता! सच में, हर नई सुबह नई उम्मीदें लेकर आती है और मुश्किलों के बीच भी खुशियों की किरण दिखती है। विश्वास और सकारात्मकता से ही हम जीवन की हर चुनौती को पार कर सकते हैं।

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      • #4
        सुबह की किरण जब आँगन छू जाए” पंक्ति मन को सुकून और आशा से भर देती है। यह कविता सुबह की उस पहली रोशनी का सुंदर चित्रण करती है, जो केवल घर के आँगन को ही नहीं बल्कि हमारे दिल को भी रोशन कर देती है। नई सुबह अपने साथ नई उम्मीदें, नई शुरुआत और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आती है।

        ऐसी रचनाएँ हमें याद दिलाती हैं कि जीवन की छोटी-छोटी खुशियाँ ही असली सुकून देती हैं — जैसे ठंडी हवा, चिड़ियों की चहचहाहट और सूरज की हल्की किरणें। यह कविता हमें हर दिन को कृतज्ञता और मुस्कान के साथ अपनाने की प्रेरणा देती है।

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        • #5
          बहुत सुंदर! आपकी कविता में सुबह की ताजगी, उम्मीद और जीवन की सीख इतनी खूबसूरती से बयां हुई है। हर पंक्ति में प्रेरणा और सकारात्मकता झलकती है। सच में, विश्वास और छोटे-छोटे पलों की खुशियाँ ही ज़िंदगी को मुस्कुराने लायक बनाती हैं।

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