Announcement

Collapse
No announcement yet.

एक छोटे से कस्बे

Collapse
X
 
  • Filter
  • Time
  • Show
Clear All
new posts

  • एक छोटे से कस्बे

    एक छोटे से कस्बे में इमरान नाम का एक चायवाला रहता था। उसकी दुकान पर रोज़ लोग आते—कुछ चाय पीने, कुछ अपनी परेशानियाँ छोड़ जाने। इमरान हर कप में थोड़ी मुस्कान मिला देता।

    एक दिन एक बूढ़ी औरत आई। बोली, “बेटा, आज चाय मीठी नहीं चाहिए, बस सुकून चाहिए।”
    इमरान ने बिना सवाल किए चाय बनाई। कप थमाते हुए बोला, “सुकून चीनी से नहीं, सुनने से आता है।”

    वो औरत बैठी और अपनी कहानी कहने लगी—बिछड़ा बेटा, खाली घर, लंबी शामें। इमरान सुनता रहा। दुकान बंद होने का वक़्त हो गया, मगर उसने कुंडी नहीं लगाई। जब औरत उठी, उसकी आँखों में आँसू नहीं थे।

    अगले दिन से वो रोज़ आने लगी। धीरे-धीरे उसकी हँसी लौट आई। कस्बे वालों ने देखा—इमरान की दुकान अब सिर्फ चाय की नहीं, दिलों की दुकान बन गई थी।

    और इमरान?
    उसे समझ आ गया था—कभी-कभी सबसे बड़ी सेवा, बस किसी की कहानी सुन लेना होती है।
    ​

  • #2
    bilkul sahi,

    Comment

    Working...
    X